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ज्ञान और विज्ञान एक साथ

सफलता के लिए जरुरी है पॉजिटिव आंखें। Positive Eyes Are Essential For Success In Hindi

सफलता के लिए जरुरी है पॉजिटिव आंखें। Positive Eyes Are Essential For Success In Hindi

Positive eyes are essential for success in hindi


सफलता के लिए जरुरी है पॉजिटिव आंखें। Positive Eyes Are Essential For Success In Hindi


दोस्तों में आपके साथ अपना एक छोटा सा एक्सपीरियंस शेयर करता हूँ कुछ दिन पहले तक जब भी में कभी समाचार पत्र या फिर टीवी पर कोई बुरी खबर देखता तो मन एकदम निराश हो जाता अब हाल ही की बात करूँ तो हमारे उत्तरप्रदेश में मासूम बच्चो की जो जाने गई उसने तो मेरे साथ साथ पूरे हिंदुस्तान को रुला दिया।, सोचता की क्या कुछ हो नहीं सकता? मैंने इस पर सोचा और एक उपाय किया जिसे आज में आपके साथ शेयर कर रहा हूँ उम्मीद है ये आपके लिए भी लाभदायक होगा।

दोस्तों सबसे पहले आप अपने दुनिया को देखने के नजरिये को बदलिए, अपने आस-पास फैली खुशियों को बटोरिए। इसके बाद धीरे-2 आपका आने वाला कल अच्छा बनने लगेगा।

हम जानते है हर इंसान अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए कोई न कोई विशेष कार्य जरूर करता है। अगर आपको अपने जीवन और करियर को बेहतर बनाना है, तो आपको एक संकल्प लेना होगा। वह है- अपने नजरिए को थोड़ा बदलने का संकल्प। आपको अपनी सामान्य नजरो से न देखते हुए पॉजिटिव आँखों से सब कुछ देखना होगा। कुछ समय आप इस तरह देखेंगे, तो फिर जिंदगी भर आपकी नजरों को अच्छाई और खुशनुमा जीवन नजर आएगा।


देखोगे तो सब अच्छा है इस दुनिया में-

अगर आपने बुराइयां देखने की ठान ली है, तो आप कैसे अपनी मंजिल तक पहुंच पाएंगे? कैसे आप वो सपने सच कर पाएंगे जिनके लिए आप इतनी मेहनत करते हो? आपको हर कदम पर बुराइयां नजर आएंगी, जो आपकी जिंदगी को निराशा से भर देगी। कहीं करप्शन होगा, कहीं भाई-भतीजावाद, कही युद्ध, आपको कहीं अवसर नहीं हैं। इससे दुखी होकर अपना सिर झुकाने की बजाय अपनी पॉजिटिव नजरें उठाएं। खुले आसमान को देखें। अपने मन के विश्वास को कमजोर न होने दें। हताशा को गुड बाय कह दें।

जो होता है सब अच्छे के लिए होता है-

दोस्तों दुनिया बहुत बड़ी है और हमारा सोचने का दायरा संकुचित। कई बार हम किसी घटना या चीज के बारे में चाहकर भी अच्छे एंगल से नहीं सोच पाते, मेरा एक दोस्त भी ऐसा है जिसे इस तरह की समस्या से हाल ही में गुजरना पड़ा पर उसने आखिर कोशिश करके अपनी आँखों को पॉजिटिव बना ही लिया। दोस्तों हर शख्स की अच्छाइयों पर गौर करना शुरू कर दें, हाँ उसमे कुछ बुराइयाँ भी जरूर होंगी पर ये आपका नजरिया है की आप किसी को किस नजर से देखते हो। एक बार ऐसा करने लगेंगे, तो हर स्थिति से सहजता से निपट लेंगे।

अच्छा देखो, अच्छा होगा-

अगर में खुद अपने वर्तमान के नजरिये की बताऊ तो अब मुझे लगता है जैसे अब इस दुनिया में जो कुछ भी है बहुत अच्छा है और बहुत अच्छा हो रहा है, में स्ट्रॉन्ग्ली कंसीडर करता हूँ की अगर मुझे कुछ बुरा भी दीखता है तो में pray करता हूँ की ईश्वर सब ठीक करेंगे और किसी के साथ गलत नहीं होंगे देंगे और उसके पीछे भी कोई अच्छा रीज़न ढूंढता हूँ। कहने की बात यह है दोस्तों की...

पूरी दुनिया अच्छाई से भरी हुई है। पर शायद हमारी आपबीती है या जगबीती, हम किसी अच्छी बात पर आसानी से Believe  ही नहीं कर पाते या जानकार भी करना नहीं चाहते। कई बार हम हर अच्छे इंसान में बुराई खोजने लग जाते हैं। कंपनी या बॉस हमारे हित में लाख कदम उठा लें, हमें यकीन ही नहीं होता कि दुनिया में हमारे साथ भी अच्छा हो सकता है। हम बस पूरी जिंदगी शक करते रहते हैं, और अपने अच्छे खासे जीवन को कोसते रहते है। कई बार वास्तविकता में हमारे साथ बहुत बुरा होता है, उस वक्त हम यह क्यों नहीं सोचते कि बुरे समय में बुरा सोचने से तो बुराई घटने की बजाय बढ़ेगी ही। इसलिए कुछ बुरा नहीं, बल्कि अच्छा-अच्छा सोचें। अच्छा सोचने से आपके अंदर सकारात्मकता आती है, जो आपको जीवन में आगे लेकर जाती है।

खुशियां आपके आस-पास ही बिखरी हैं -

दोस्तों अक्सर लोगों को लगता है कि खुशियां बड़ी मुश्किलों से मिलती हैं। में मंटा हूँ, यह सच नहीं है। खुशियां तो हमेशा आस-पास ही बिखरी होती हैं। इन्हें बटोरने वाला इंसान चाहिए, और उसके लिए आपको सकारात्मक नजरिया चाहिए। खुशियों के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की बिना किसी स्वार्थ के मदद करते हैं तो खुशियों का खजाना मिल सकता है।

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दोस्तों हमें एक पोस्ट लिखने में काफी मेहनत और समय लगता हैं आप इस पोस्ट के ऊपर अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे।
में भी स्वतंत्रा चाहती हूँ। व्यंगात्मक लेख

में भी स्वतंत्रा चाहती हूँ। व्यंगात्मक लेख

i want freedom too, women's freedom inspiring article in hindi


में भी स्वतंत्रा चाहती हूँ। व्यंगात्मक लेख - I want freedom too. Satirical article In Hindi -

दोस्तों सबसे पहले आप सभी को 71st स्वतंत्रता दिवस की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं।
ज्ञान बाजार के इस ज्ञान के सफर पर हमारे साथ अब तक बने रहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, में आशा करता हूँ की आप ऐसी तरह हमारा साथ देंगे और हमें प्रोत्साहित करेंगे की हम आपके लिए अच्छे से अच्छे और रोमांचकारी हिंदी लेख हर हफ्ते पेश करें।

दोस्तों पूरा आज भारत देश अपनी स्वतंत्रता की 71वीं वर्षगाँठ मन रहा है। हम सब आज़ाद है...सब अपने मन की कर सकते है... एक मिनट रुकिए, मेरा आपसे एक सवाल है की क्या हर महिला भी सब कुछ कर सकती है? ज्यादातर लोगों का ऊपरी जबाव होगा 'हा' हो सकता है, पर अगर हम गौर करेंगे तो पता लगेगा की महिला के मन में आज भी छटपटाहट है। महिलाएं आज भी कई चीजों से आज़ादी चाहती है। अगर हम अपने आस-पास देखेंगे तो आसानी से पता लग जाएगा की आज भी महिलाएं अलग अलग स्तर पर कड़ा संघर्ष कर रही है। में मंटा हूँ की उनका यह संघर्ष खुद को सही साबित करने का है। यह संघर्ष मुक्ति के मार्ग का है। यह संघर्ष खुद की वाजिब मांग मनवाने का है। यह संघर्ष असली आज़ादी का है।

“सभी   महिलाएं  अपनी   माँ  की  तरह  बन जाती हैं . यह उनकी   त्रासदी  है . कोई  पुरुष  नहीं  बनता  . यह  उसकी  त्रासदी  है.”
- Oscar Wilde  आस्कर  वाइल्ड

में हमेसा यह सोचता हूँ की की आज़ाद भारत में कितनी आज़ाद है हमारी आधी आबादी ,...क्या अपने कभी इसपर विचार किया है? नई पीढ़ी की बहू- बेटियां हो या दादी-नानियां, आज भी वे कुछ ख़ास चीजों से आज़ादी चाहती है, मुक्ति मांगती है। लेकिन ऐसा भी नहीं है की महिलाओं ने तरक्की नहीं की या उन्हें आगे बढ़ने के मौके नहीं मिले। काफी कुछ अच्छा हुआ है और हो रहा है, पर महसूस होता है की कुछ न कुछ कमी है।
आज भी कइयों को तो यह तक पता नहीं की उनके जीवन का अर्थ क्या है। पूरा का पूरा जीवन परिवार, बच्चे और पति के लिए समर्पित कर चुकी महिला भी एक इंसान है, उसके भी कुछ सपने है। वह भी आसमान की बुलंदियां छूने को छटपटा रही है। देश की आज़ादी की वर्षगांठ के सुनहरे मौके पर पता करते है की महिला मन कैसी आज़ादी चाहता है-

पहनावे की आज़ादी - Freedom of dress 

दोस्तों ये तो हम सब जानते है की महिलाओं की उनके पहनावे के वजह से बहुत कुछ सुनना पड़ता है और ये सब हम आज के समय में भी देखते है। महिलाओं को सबसे ज्यादा किस चीज के लिए परेशां किया जाता है, वह है, उनका पहनावा। घर में क्या पहनना है, शादी में क्या, बड़े बुजुर्गों के सामने क्या, यह सब कोई और तय करता है तो महिला की पहनावे की आज़ादी पर सीधा हमला होता है। महिलाओं को उनके पहनावे की आज़ादी मिलनी चाहिए। वह क्या पहने - क्या न पहने , इसका फैसला खुद महिला को करना चाहिए। जब घर, परिवार या समाज महिलाओं का पहनावा तय करने लगता है तो महिला अपने आप में अपमानित महसूस करती है। अपने तन को किस तरह ढकना है, यह महिला बखूबी जानती है। उसे किसी की सीख की जरुरत नहीं है।

घूँघट हटाने की आज़ादी - Freedom of throat veil

दोस्तों मेरा पक्का मानना है की जैसे पूरे भारत में स्वछता का अभियान चल रहा है की गंदगी हटाओ उसी तरह घूँघट को परचम बनाने की पहल आज़ादी के इस पर्व पर करना जरुरी है। घर में कोई बड़ा बुजुर्ग आये तो उसे पूरा सम्मान देना जरुरी है, पर घूँघट के नाम पर एक कोने में खड़े रहना भी कहा तक ठीक है? बड़ो की सेवा करें, उनकी हर बात मानें, पर अपने मन की बात कहने के लिए महिलाओं को घूँघट से आज़ादी मिलनी भी तो चाहिए। महिलाओं को घूँघट से आज़ादी देने पर उनका खोया आत्मविश्वास जागेगा और खुलकर भी जी पाएंगी।

“कोई भी देश यश के शिखर पर तब तक नहीं पहुंच सकता जब तक उसकी महिलाएं कंधे से कन्धा मिला कर ना चलें।“

खुद के बारे में सोचने की आज़ादी - Freedom to think about yourself

कई घरों में देखा जाता है की महिला परिवार के चक्कर में खुद के बारे में सोच ही नहीं पाती। दिनभर इधर से उधर भागते दौड़ने के कारण वह परेशां भी होती है, थकती भी है, पर कोई नहीं है जो उसका खयाल रखें। हर महिला को खुद के बारे में सोचने की आज़ादी तो मिलनी ही चाहिए। अगर महिला अपने बारे में सोचेगी तो बेहतर काम करेगी और ज्यादा ऊर्जा से परिवार को एक सूत्र में बांधे रख सकेगी।

मन की बात कह देने की आज़ादी - Freedom of mind

दोस्तों आज भी कई परिवार में महिलाएं अपने मन की बात खुलकर नहीं कह पाती है। घर के हर फैसले बड़े -बुजुर्ग लेते है और महिलाएं मन मसोस कर रह जाती है। महिलाओं को मन की बात कहने की आज़ादी मिलेगी तो पूरे परिवार को फायदा होगा और महिलाओं के मन में दबे विचार बाहर निकलेंगे। बात सुन लेने में कोई हर्ज नहीं है। मिल - बैठकर, सबकी सुनकर फैसला लेने से कभी किसी परिवार को कोई नुकसान नहीं हुआ।

“हम हमेशा देखते हैं जब आदमी स्त्री से प्यार करता है। वो अपनी ज़िन्दगी का बहुत छोटा हिस्सा देता है. पर जब स्त्री प्यार करती है वो सबकुछ दे देती है।“

पैसा कमाने खर्चने की आज़ादी - Freedom to earn & Spend money 

महिलाओं को जिस तरह तरह पैसा कमाने और खर्चने की आज़ादी मिल जाएगी, सच्चे अर्थों में वह दिन महिलाओं के लिए बहुत बड़ा दिन होगा। आज भी समाज में बहुत कम महिलाएं खुद अपने पैरों पर खड़ी है।  कुछ महिलाएं पैसा तो कमाती है पर उन्हें खर्च करने की आज़ादी नहीं है। महिलाएं भी पढ़ लिखकर अपने काबिलियत साबित कर रही है तो फिर नौकरी करने में क्या हर्ज है। कुछ लोगों को लगता है की इससे परिवार का 'मेनेजमेंट बिगड़ जाएगा, पर वे यह भूल जाते है की हर महिला में एक अच्छा "मैनेजर" छिपा रहता है। महिलाएं सब कुछ मैनेज करके चलती है। किसी पर आश्रित रहने की बजाय खुद मजबूत बनकर परिवार को संभालने से महिलाओं की जिंदगी बदल सकती है।

“जब आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं; आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं; लेकिन आप एक स्त्री को शिक्षित करते हैं, आप एक पीढ़ी को शिक्षित करते हैं।“

अकेले बाहर निकले की आज़ादी - Freedom to come out alone

दोस्तों एक बात तो है घर की चारदीवारी में काम करते-करते महिला पूरी दुनिया से काट जाती है। महिलाओं को पता नहीं लगता की उनके शहर-कस्बे, गली- मोहल्ले में क्या घट रहा है। वह सब कुछ छोड़कर बस अपने काम में मगन रहती है। घर में पुरुष आते है, महिलाएं उनके साथ घर से बाहर निकलती है, फिर जरुरी काम पूरे हो पाते है। इससे परिवार के पूरे काम गड़बड़ हो जाते है। हर तरह के बंधनो से मुक्त करके महिलाओं के मन में विश्वास का बीज बोना होगा। उन्हें चारदीवारी से आजादी मिलेगी तो सबका भला होगा, बुरा किसी का नहीं।

दोस्तों महिलाओं से जुडी पाबंदियों और कुरूतियों की List तो बहुत लम्बी होती है, पर ये कुछ ऐसी बाते है जो हम रोज देखते है, सुनते है,पर फिर भी कुछ नहीं करते। पर अब समय है की इस तरफ भी थोड़ा ध्यान दिया जाए।


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शाहरुख़ खान की प्रेरक स्पीच TED Talk हिंदी में

शाहरुख़ खान की प्रेरक स्पीच TED Talk हिंदी में

Shah Rukh Khan Thoughts On humanity, fame and love in hindi


Shah Rukh Khan: मानवता, यश और प्रेम पर विचार | TED Talk


हेलो दोस्तों आज में आपके साथ एक ऐसे भारतीय की इंस्पिरेशनल स्पीच शेयर करने वाला हूँ जिसने दुनियाभर में भारतियों का और भारत की फिल्म इंडस्ट्री का नाम रोशन किया हैं। शाहरुख खान, जी हाँ ये वो शख्स है जिन्होंने न केवल भारतीय फिल्मों में शानदार किया बल्कि ऑफलाइन भी एक अच्छे पिता-पति और दोस्त भी है। शाह रुख खान न केवल अपनी अभिनय से बल्कि अपने जीवन के लाइफ लेसंस से भी लोगों को inspire करते हैं।


बीते महीनो मई में शाह रुख खान साहब ने Ted Talk हेलो दोस्तों आज में आपके साथ एक ऐसे भारतीय की इंस्पिरेशनल स्पीच शेयर करने वाला हूँ जिसने दुनियाभर में भारतियों का और भारत की फिल्म इंडस्ट्री का नाम रोशन किया हैं। शाहरुख खान, जी हाँ ये वो शख्स है जिन्होंने न केवल भारतीय फिल्मों में शानदार किया बल्कि ऑफलाइन भी एक अच्छे पिता-पति और दोस्त भी है। शाह रुख खान न केवल अपनी अभिनय से बल्कि अपने जीवन के Life Lessons से भी लोगों को Inspire करते हैं।
बीते महीनो मई में शाह रुख खान साहब ने TED Talk, जो की एक ऐसा वैश्विक मंच है जहा दुनिया के बेहतरीन लोग अपने लाइफ लेसंस और विचारों से लोगो को Guide , Inspire  और Motivate  करते है।
शाह रुख खान साहब को भी बीते दिन वह बुलाया गया जो की हर भारतीय के लिए गर्व की बात हैं। अब में आप लोगो के साथ शाह रुख खान साहब की हिंदी translate स्पीच शेयर करता हूँ,...!

नमस्कार। मैं एक फ़िल्म स्टार हूँ, मैं 51 वर्ष का हूँ, और मैंने अभी तक बोटोक्स इस्तेमाल नहीं किया है। मैं शालीन हूँ, पर जैसा फ़िल्मों में देखा होगा मैं 21  वर्षीय जैसा व्यवहार करता हूँ। हाँ, मैं वह सब करता हूँ। मैं सपने बेचता हूँ और भारत के करोड़ों लोगों में प्रेम बाँटता हूँ जो मानते हैं कि मैं सँसार का सबसे बेहतर प्रेमी हूँ। अगर आप किसी से कहेंगे नहीं, तो आपको बता दूँ कि मैं ऐसा नहीं हूँ, पर मैं इस मान्यता को ऐसे ही रहने देता हूँ। 
मुझे यह भी समझाया गया है कि, आपमें से बहुत लोग ऐसे हैं जिन्होंने मेरा काम नहीं देखा है, और मुझे आपके लिए सच में दुःख है। पर इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अपनी धुन में मस्त नहीं रहता, जैसा एक फ़िल्मस्टार को होना चाहिए। ऐसे समय में मेरे दोस्तों, क्रिस और जुलियेट ने मेरे भविष्य के बारे में बात करने मुझे यहाँ बुलाया। स्वाभाविक है, मैं वर्तमान के "स्वयं" के बारे में बात करूँगा।

क्योंकि सच में मैं यह मानता हूँ कि मानवता मेरे ही जैसी है। हाँ, ऐसा ही है। वह एक बूढ़े हो रहे फ़िल्म स्टार की तरह है, अपने आस-पास की नवीनता से जूझती हुई, सोचती हुई कि उसने पहली बार में सही किया या नहीं, और अभी भी रास्ता ढूँढती हुई इस सबके बावजूद, चमकते रहने के लिए। मैं भारत की राजधानी, नई दिल्ली की एक शरणार्थी बस्ती में पैदा हुआ। और मेरे पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे। मेरी माँ भी, हर माँ की तरह एक लड़ाकू थीं। और वास्तविक मानव जाति की तरह, हम जीने के लिए संघर्ष करते थे। जब मेरी उम्र 20  के आस-पास थी, मैंने अपने माता-पिता को खो दिया, जो मुझे मानना होगा अब कुछ हद तक मेरी लापरवाही लगती है, परंतु...


मुझे याद है वह रात जब मेरे पिता की मृत्यु हुई, और मुझे याद है वह पड़ोसी का ड्राइवर जो हमें अस्पताल लेकर जा रहा था। उसने कुछ बड़बड़ाया "मरे हुए लोग टिप भी अच्छी नहीं देते" और अँधेरे में चला गया। और मैं तब सिर्फ़ 14 साल का था, और मैंने अपने पिता के मृत शरीर को कार की पिछली सीट में रखा, और मेरी माँ मेरे साथ बैठीं, मैंने अस्पताल से घर की ओर चलाना शुरू कर दिया। और माँ ने सुबकते हुए मेरी ओर देखकर कहा, "बेटा, तुमने गाड़ी चलाना कब सीखा?" और मैंने उस बारे में सोचा और एहसास हुआ, और माँ से कहा, "बस अभी, माँ।"

तो उस रात के बाद से, मानवता की किशोरावस्था की तरह, मैने जीने के रूखे तरीके सीख लिए। और सच कहूँ तो, उस समय जीने का अंदाज़ बहुत ही साधारण था। जानते हैं, आपको जो मिलता था वह खा लेते थे और जो कहा जाता था वह कर देते थे। मैं "सिलिएक" को एक सब्ज़ी समझता था, और शाहकारी, तो अवश्य ही स्टार ट्रेक के मिस्टर स्पॉक का बिछड़ा हुआ यार था।
तुम शादी उस लड़की से करते थे जिससे पहली बार मिलते थे, और तुम टेकी थे अगर अपनी कार के कारब्युरेटर ठीक कर सकते थे। मैं सच में सोचता था कि समलैंगिक खुश के लिए एक गूढ़ शब्द था। और लेस्बियन तो अवश्य ही पुर्तगाल की राजधानी थी, जैसा आप सब जानते हैं। मैं कहाँ था? हम उन प्रणालियों पर निर्भर थे जो हमारी रक्षा के लिए पहले की पुश्तों ने मेहनत और त्याग से बनाई थीं, और हम सोचते थे कि सरकारें हमारे भले के लिए काम करती हैं। विज्ञान सरल और तार्किक था, "अॅप्पल" तब भी एक फल ही था जो ईव के बाद न्यूटन का था, तब तक स्टीव जॉब्स का नहीं हुआ था। और तुम यूरेका चिल्लाते थे जब गलियों में नंगे भागना चाहते थे। काम के लिए ज़िंदगी जहाँ ले जाती, वहाँ चले जाते थे, और लोग तुम्हारा स्वागत करते थे। तब प्रवासन एक शब्द था साइबेरिया की ट्रेनों के संदर्भं में इस्तेमाल होता था, मनुष्यों के लिए नहीं। सबसे अहम, तुम वह थे जो तुम थे और वही बोलते थे जो सोचते थे।

फिर मेरे 20  के बाद के वर्षों में, मैं विशाल महानगर मुंबई चला गया, मेरा सोचने-विचारने का तरीका, एक नई औद्योगिकृत आकांक्षाओं से भरी हुई मानवता की तरह परिवर्तित होने लगा। अधिक आलंकृत जीवन की शहरी रफ्तार में, चीज़ें कुछ अलग सी दिखने लगीं। मैं संसार भर से आए लोगों से मिला, चेहरे, जातियाँ, लिंगों, साहूकारों से। परिभाषाएँ बदलने लगीं। उस वक्त काम आपको परिभाषित करने लगा एक बहुत ही समान तरीके से, और सभी प्रणालिया मुझे विश्वास खोते हुए दिखाई देने लगीं, मानवता की भिन्नता और मनुष्य की आगे बढ़ने और विकसित होने की ज़रूरत के लिए उनका सहारा लेना मुश्किल होने लगा। विचाार अधिक आज़ादी और गति से बहने लगे। और मैंने मानव के नवप्रवर्तन और सहयोग के चमत्कार को अनुभव किया, और मेरी स्वयं की सृजनात्मकता, ने इस सामूहिक प्रयास की कुशलता की सहायता से मुझे सर्वश्रेष्ठ सितारा बना दिया।


मुझे महसूस होने लगा कि मैं मंज़िल पर पहुँच गया हूँ, और सामान्यत: 40  तक पहुँचते हुए, मैं बस सातवें आसमान पर था। मेरा प्रभाव सब जगह था। जानते हैं मैं तब तक 50  फ़िल्में कर चुका था और 200 गाने, और मुझे मलेशिया के लोगों द्वारा सम्मानित किया गया। फ़ाँस की सरकार ने मुझे उनका सर्वोच नागरिक सम्मान दिया, जिसका शीर्षक मैं आज तक सही से बोल नहीं सकता हूँ। इसके लिए माफ़ी चाहता हूँ, फ़ाँस, और मुझे वह देने के लिए शुक्रिया, फ़ाँस। पर उससे भी ज़्यादा, मुझे एंजेलीना जोली को मिलने का मौका मिला..ढाई सेकंड के लिए।

और मुझे विश्वास है उन्हें भी वह मुलाकात कहीं याद होगी। ठीक है, शायद नहीं होगी। और मैं खाने की गोल मेज़ पर हाना मोंटाना के साथ बैठा था जब अधिकतर समय उसकी पीठ मेरी तरफ़ थी। जैसा मैंने कहा, मैं माइली से जोली की तरफ़ उड़ रहा था, और मानवता मेरे साथ उड़ रही थी। हम दोनों काफ़ी हद तक हर जगह उड़ रहे थे। और फिर आप जानते हैं क्या हुआ। इंटरनेट शुरू हो गया। मैं अपने 40  वें साल में था, और पिंजरे में बैठे पक्षी की तरह मैंने ट्वीट करना शुरू कर दिया और यह मानकर कि जो लोग मेरी दुनिया में ताक-झाँक करते हैं उसकी प्रशंसा करेंगे क्योंकि मैं उसे एक चमत्कार समझता था। पर मेरे और मानवता के लिए कुछ और ही लिखा था। आप जानते हैं, हम सोचते थे कि विचारों और सपनों का विस्तार होगा संसार में बढ़ती हुई क्नेक्टिविटी के साथ। जिस जगह से आज़ादी और क्रांति का जन्म हो रहा था, हमने वहीं से गाँव की तरह विचारों के, विवेक के, परिभाषा के सिमटने का सौदा नहीं किया था। जो कुछ मैं कहता, उसका नया अर्थ निकाला जाता। जो भी मैं करता... अच्छा, बुरा, भद्दा... उसपर सारा संसार अपनी टिप्पणी करता था। असलियत में, मैं जो कुछ नहीं भी करता या कहता उसका भी वही हश्र हो रहा था।

चार साल पहले, मेरी प्यारी बीवी गौरी और मैंने तीसरे बच्चे का निर्णय लिया। नेट पर दावा किया गया कि वह हमारे पहले बेटे जो 15  साल का था की औलाद था। स्पष्ट तौर से, उसने रोमानिया में लड़की की कार चलाते हुए ऐसा किया था। और हाँ, इसके साथ एक नकली व्हिडिओ भी था। और इससे सारा परिवार परेशान था। मेरा बेटा, जो अब 19 का है, आप उसे अभी भी "हेलो" बोलो तो, वह बस पलटकर कहता है, "पर भाई, मेरे पास तो यूरोप का ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था।"हाँ। इस नए सँसार में, धीरे-धीरे, हकीकत काल्पनिकता बन गई और काल्पनिकता हकीकत, और मुझे एहसास होने लगा जो मैं बनना चाहता था, बन नहीं सकता, या जो सोचता था, वह बोल नहीं सकता, और इस वक्त मानवता पूरी तरह से मेरी जैसी ही दिखती थी। मेरे विचार में हम दोनों अधेड़ उम्र के संक्रमण काल से गुज़र रहे थे, और मानवता, मेरी ही तरह, उद्भासित गायिका बनी जा रही थी। मैंने सबकुछ बेचना शुरू कर दिया, बालों के तेल से लेकर डीज़ल के जेनरेटरों तक। मानवता सब खरीद रही थी, कच्चे तेल से लेकर न्यूक्लियर रियेक्टरों तक। जानते हैं, मैंने खुद को नया परिचय देने के लिए तंग सुपरहीरो सूट पहनने की कोशिश भी की। मुझे मानना पड़ेगा कि बुरी तरह से असफल हुआ। मैं सँसार के सभी बॅटमेन, स्पाइडर-मेन और सुपरमेन की तरफ़ से कहना चाहूँगा, आपको उनकी प्रशंसा करनी चाहिए, क्योंकि वह बहुत तंग होता है, वह सुपरहीरो का सूट।

हाँ, मैं सच कह रहा हूँ। मुझे आपको यहाँ यह बताना होगा। सच में। और इत्तफाक से, मैंने नाचने की एक नई शैली की भी रचना की जो मुझे पता नहीं चला, और वह बहुत लोकप्रिय हो गया। तो अगर सही लगे तो, और आप मुझे थोड़ा तो देख ही चुके हैं, तो मैं बेशर्म तो हूँ, मैं आपको दिखाता हूँ। उसे लूँगी डाँस कहते थे। तो अगर सही लगे, मैं आपको अभी दिखाऊँगा। मैं वैसे काफ़ी प्रतिभावान हूँ। तो वह कुछ ऐसे था।

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लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी डाँस। लुँगी। बस यह ही था। काफ़ी लोकप्रिय हो गया था।

सच में हो गया था। जैसा आपने देखा, मेरे सिवा किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था कि क्या हो रहा है, और मुझे परवाह नहीं, सच में, क्योंकि सारा संसार, और सारी मानवता, उतनी ही उलझन में और गुमराह थी जितना मैं। मैंने तब भी उम्मीद नहीं छोड़ी। सोशल मीडिया पर मैंने फिर से अपनी छवि बनाने की कोशिश की जैसा कि सब करते हैं। मैंने सोचा कि अगर मैं तार्किक ट्वीटें डालूँगा लोग सोचेंगे मैं वैसा हूँ, पर उन ट्वीटों के बदले में जो कुछ जवाब मुझे आए बहुत ही उलझन भरी संक्षिप्तियाँ थीं जो मैं समझ नहीं पाया। आपको पता है? आर ओ एफ़ एल, एल ओ एल। किसीने मेरी एक विचारोत्तेजक ट्वीट पर लिखा "एडीडास" और मैं सोच रहा था कि जूते का नाम क्यों लिखा होगा, मेरा मतलब आप जूते का नाम लिखकर मुझे क्यों भेजेंगे? और मैंने अपनी 16-वर्षीय बेटी को पूछा, और उसने मुझे बताया। "एडीडास" का अब मतलब है "ऑल डे आई ड्रीम अबाउट सेक्स।"

सच में। मुझ नहीं पता अगर आप वह जानते हैं। तो मैंने मिस्टर एडीडास को मोटे अक्षरों में "डब्लू टी एफ" वापिस लिख दिया, मन ही मन शुक्रिया करते हुए कि कुछ संक्षिप्तियाँ और चीज़ें कभी बदलेंगी नहीं। डब्लू टी एफ। परंतु हम यहाँ पर हैं। मैं 51 का हूँ, जैसा मैंने आपको बताया, और दिमाग को हिलाने वाली संक्षिप्तियों पर ध्यान ना देते हुए, मैं बस आपको बताना चाहता हूँ अगर मानवता के अस्तित्व के लिए कोई महत्वपूर्ण समय है, तो वह अभी है, क्योंकि आज के आप साहसी हो। आज के आप आशावादी हो। आज के आप नवीन और साधन सम्पन्न हो, और अवश्य ही, आज के आप अपरिभाष्य हो। और इस मंत्र-मुग्ध करने वाले, अस्तित्व के अपूर्ण क्षण में, यहाँ आने से पहले मैं थोड़ा सा साहसी महसूस कर रहा था, मैंने अपने चेहरे पर एक अच्छी, कड़ी निगाह डालने का निर्णय लिया। और मुझे एहसास हुआ कि मैं मैडम तुस्साद के मेरे मोम के पुतले जैसा अधिक दिखने लगा हूँ।

हाँ, और एहसास के उस पल में, मैंने स्वयं और मानवतासे सबसे केंद्रीय और उपयुक्त सवाल पूछा: मुझे अपने चेहरे को ठीक करने की ज़रूरत है? सच में। मैं एक अभिनेता हूँ, जैसा मैंने आपको बताया, मानव की सृजनात्मकता की एक आधुनिक अभिव्यक्ति। मैं जिस देश का वासी हूँ अकथनीय परंतु अत्यंत सरल आध्यात्मिकता का स्त्रोत है। उसकी असीम उदारता में, भारत ने किसी तरह निर्णय लिया कि मैं, एक स्वतंत्रता सेनानी का मुस्लिम बेटा जो अनजाने में सपने बेचने के कारोबार में आ गया, को इसके रोमाँच का राजा बनना चाहिए, "बॉलीवुड का बादशाह", देश का सबसे बेहतरीन प्रेमी... इस चेहरे के साथ। हाँ।
जिसे बदले में भद्दा, अपरंपरागत, और हैरानी की बात है इतना चॉक्लेटी नहीं कहा गया है।
इस प्राचीन भूमि के लोगों ने अपने असीमित प्रेम से मुझे गले लगाया, और मैंने इन लोगों से सीखा है कि ना सत्ता ना ही गरीबी आपके जीवन को अधिक शानदार या कम जटिल बना सकते हैं। मैंने अपने देश के वासियों से सीखा है कि एक जीवन, एक मनुष्य, एक संस्कृति, एक धर्म, एक देश की शान उसकी करूणा और सहानुभूति की क्षमता में ही बसती है। मैंने सीखा है कि जो आपको हिला सकता है, जो आपको प्रेरित करता है, रचना और निर्माण करने के लिए, जो आपको असफलता से बचाता है, जो आपको जीना सिखाता है, वह है मानवता की सबसे पुरानी और सरल भावना, और वह है प्रेम। मेरे देश के एक आध्यात्मिक कवि ने लिखा था, पोथी पढ़ी-पढ़ी जग मुआ, पंडित भया ना कोई, पोथी पढ़ी-पढ़ी जग मुआ, भया ना पंडित कोई। ढाई आखर प्रेम के पढ़े सो पंडित होय। जिसका अनुवाद है कि जो भी... हाँ, अगर आप हिंदी जानते हैं, कृपया ताली बजाएँ, हाँ।

याद रखना बहुत मुश्किल है। जिसका अनुवाद करें तो वास्तव में ऐसा होगा कि आप ज्ञान की कितनी भी किताबें क्यों ना पढ़ लें और फिर अपना ज्ञान बाँटें आविष्कार, सृजनात्मकता, तकनीक के द्वारा, पर मानवता अपने भविष्य को सही से नहीं जान पाएगी जब तक इनके साथ अपने साथियों के लिए प्रेम और सहानुभूति नहीं लाएगी। "प्रेम" शब्द के ढाई अक्षर, जिसका अर्थ है प्यार, अगर आप यह समझ लें और इसे अपनाएँ, मानवता को प्रबुद्ध करने के लिए बस इतना ही काफ़ी होगा। तो यह मेरी पक्की धारणा है कि भविष्य के आप एक ऐसे आप होने चाहिए जो प्रेम करे। नहीं तो यह फलना-फूलना बंद कर देगा। अपने ही स्व-अवशोषण में नष्ट हो जाएगा।

तो आप अपनी शक्ति का प्रयोग कर सकते हो, दीवारें बनाने के लिए और लोगों को बाहर रखने के लिए, या आप इसका प्रयोग बाधाएँ तोड़कर उन्हें अंदर लाने में कर सकते हो। आप अपनी श्रद्धा का प्रयोग लोगों को डराने में कर सकते हो और डराकर समर्पण करवा सकते हो, या आप उसका प्रयोग लोगों की हिम्मत बढ़ाने में कर सकते हो ताकि वे प्रबुद्धता की चरम सीमा तक पहुँच पाएँ। आप अपनी शक्ति का प्रयोग परमाणु बम बनाकर विनाश का अँधकार फैलाने में कर सकते हो, या आप उसके प्रयोग से करोड़ों के जीवन में खुशी का दीपक जला सकते हो। आप संवेदनाहीन बनकर महासागरों को दूषित कर सकते हो और वनों को नष्ट कर सकते हो। आप पर्यावरण को नष्ट कर सकते हो, या उन्हें प्रेम से सींचते हुए पानी और वृक्षों से नए जीवन का आरम्भ कर सकते हो। आप मंगल ग्रह पर जा सकते हैं और सशस्त्र किले बना सकते हैं, या आप जीवन की प्रजाती और रूप ढूँढकर उनका सम्मान करके उनसे सीख सकते हैं। और आप हम सभी के कमाए पैसे का प्रयोग करते हुए व्यर्थ के युद्ध छेड़ सकते हो और नन्हें बच्चों के हाथों में बंदूकें दे सकते हो ताकि वे एक-दूसरे को मार सकें, या आप उसका प्रयोग कर सकते हैं उनका पेट भरने के लिए अधिक भोजन उगाने में।

मेरे देश ने मुझे सिखाया है एक मनुष्य की प्रेम की क्षमता धार्मिकता के बराबर है। यह उस सँसार में दमकती है जिसे मेरे खयाल में, सभ्यता बहुत अधिक उजाड़ चुकी है। पिछले कुछ दिनों में, यहाँ की वार्ताएँ, कमाल के लोग जो आकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे थे, व्यक्तिगत उपलब्धियों, आविष्कारों, तकनीक, विज्ञान के बारे में बात कर रहे थै यहाँ होने की वजह से जो ज्ञान हम पा रहे हैं टेड टॉक्स औऱ आप सबकी उपस्थिति में पर्याप्त कारण हैं हमें भविष्य के "हम" का जश्न मनाने के लिए। परंतु उस जश्न में हमारी प्रेम और सहानुभूति की क्षमता को बढ़ावा देने की हमारी खोज को दृढ़ता से सामने लाना होगा, को दृढ़ता से सामने लाना होगा, उतनी ही बराबरी से।

तो मेरा मानना है कि भविष्य के "आप" एक अनन्त "आप" हैं। इसे भारत में चक्र कहते हैं, एक वृत्त की तरह। वह सम्पूर्ण होने के लिए जहाँ से शुरू होता है वहीं पर अंत होता है। एक "आप" जो समय और अंतरिक्ष को अलग नज़रिये से देखते हैं दोनों को समझते हैं आपका अकल्पनीय और गज़ब का महत्व और सृष्टि के संदर्भ में आपकी पूर्ण महत्वहीनता। एक "आप" जो वापिस जाते हो मानवता की मौलिक मासूमियत में, जो हृदय की पवित्रता से प्रेम करते हो, जो सत्य की आँखों से देखते हो, जो एक अक्षत दिमाग की स्पष्टता से सपने लेते हो।
भविष्य के "आप" एक बूढ़े हो रहे फ़िल्म स्टार की तरह होना चाहिए जिसे यह मानने पर मजबूर किया गया है कि एक ऐसे सँसार की संभावना है जो पूर्ण रूप से अपने ही जुनून में अपने ही प्रेम में संलिप्त हो। एक सँसार ... सच में, एक "आप" चाहिए जो उस सँसार की रचना करे जो अपना ही बेहतरीन प्रेमी हो। मेरा मानना है, देवियों औऱ सज्जनों, वह होंगे भविष्य के "आप"।

बहुत-बहुत शुक्रिया। शुक्रिया।"

दोस्तों सच में शाह रुख खान साहब ने कितनी सच्ची बात कही है और हमें कितना कुछ सिखाया है। जो कुछ बी है वो हमारे आज में है और हम में है। जिससे हमारी पहचान है। में स्वयं शाह रुख खान साहब का बहुत बड़ा प्रसंशक हूँ।


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पीएम से सीखें कम्यूनिकेशन स्किल्स। Learn Communication Skills from PM

पीएम से सीखें कम्यूनिकेशन स्किल्स। Learn Communication Skills from PM

Learn Communication Skills from primeminister in hindi



पीएम से सीखें कम्यूनिकेशन स्किल्स। Learn Communication Skills from Prime Minister In Hindi


दोस्तों लम्बे समय से समाज में नजरअंदाज की जा रही किसी बात को चर्चा का विषय बना देने में, लोगों तक अपना सन्देश पहुंचाने में किसी कॉमन कॉज के लिए सबको एकजुट करने में Better Communication  Skill वाले लोगों की अप्प्रोच बहुत प्रभावी होती हैं। आज में आपसे ऐसे ही एक खास व्यक्ति के कम्युनिकेशन स्किल के  बारे में बताऊंगा जिस से हम बहुत कुछ सीख सकते है। मुझे दोस्तों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की आम लोगों से संपर्क में रहने की एक अप्रोच सबसे बढ़िया लगती है। वह अप्रोच है- प्रभावी कम्युनिकेशन की। अपने इस कम्युनिकेशन के लिए वे हर उस माध्यम का उपयोग करते है, जो उनके प्रमुख टारगेट ऑडियंस पर ज्यादा असर कर सकते हैं। कम्यूनिकेट करने की उनकी इस प्रभावी अप्रोच से आज बहुत से इंटरप्रेन्योर भी प्रेरणा ले सकते है।


युवाओं में सेल्फी के प्रति दीवानगी को प्रोमोट करने वाले और पूरे देश को एक साथ 'मन की बात' सुनने के लिए एकजुट करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सोशल और मेनस्ट्रीम मीडिया में लगातार चर्चा में रहते है। सोशल मीडिया पर उनके हर कदम का सुर्ख़ियों में छाना उनके प्रभावी संवाद की एक बानगी है, और आज में आपके साथ उनके कुछ ख़ास तरीको को शेयर करुँगी कम्युनिकेशन से जुड़े, जो न सिर्फ आम इंसान को बल्कि एक उद्यमी इंसान के लिए भी अपनी बातों को सही तरीके से टार्गेटेड ऑडियंस पर पहुंचने में सहायता मिलेगी-


बड़ी पहुँचबड़ा प्रभाव -

दोस्तों देश के साथ 'मन की बात' साझा करने के लिए उन्होंने रेडिओ को जब मूल माध्यम के रूप में चुना तो उन्होंने सिर्फ शहरी युवाओं तक ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचलोंम में खेतों में हल चला रहे किसान तक अपनी पहुँच बना ली। इसके अलावा न्यूज़ चैनल्स, ऑनलाइन मीडियम तो थे ही। अपने पास सभी संसाधनों को एक साझा उद्देश्य के लिए समर्पित करके उन्होंने कही जा रही बात का सही जगह पहुंचना सुनिश्चित किया।

पीएमओ की साइट -

पीएम का पद सँभालने के साथ ही उन्होंने पीएमओ की वेबसाइट को नया रूप दिया। इससे उनके भाषणों, कार्यक्रमों, उनके द्वारा उठाये गए क़दमों के बारे में सीधा और तात्कालिक संवाद कायम हो सका। उन्होंने ऐसे लोगों के साथ संवाद का माध्यम बताया था। अब कोई भी नागरिक अपनी शिकायत या किसी भी योजना या मुद्दे पर अपनी बातें सीधे पीएम के साथ शेयर कर सकता है।

वाइबो पर पीएम - 

दोस्तों एक बार अपनी चीन यात्रा से पहले चीनी नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए चाइनीज़ सोशल नेटवर्किंग साइट वाइबो पर पीएम का आना बड़े स्तर पर चर्चा का विषय रहा। उनके यह कदम में झलकता है की वे अपने टारगेट ऑडियंस से सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में नए-नए प्रयोग करने से भी चूकने वाले नहीं है। उनके इस कदम को हाथों हाथ लिया गया और खूब सराहना भी हुई।

एक नहीं मंच है कई -

सोशल मीडिया के महत्त्व और पहुँच को समझने वाले पीएम फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे विभिन्न मंचों पर अपनी उपस्थिति सक्रियता से दर्ज करते हैं। एक से अधिक मंच होने का लाभ यह है की आपकी पहुँच कही ज्यादा व्यापक हो जाती हैं और आपके पास सन्देश पहुंचाने के लिए कई तरह के फीचर्स भी उपलब्ध रहते है। फोटो, टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो ये सब अपनी बात कहने के अलग अलग माध्यम है।


सन्देश नहीं, संवाद -


दोस्तों कम्युनिकेशन में सबसे बड़ा बैरियर तब आ जाता है, जब यह संवाद न होकर सन्देश बनकर रह जाता है और दूसरे पक्ष को अपनी बात कहने का मौका नहीं मिलता। लेकिन सोशल मीडिया नेटवर्क पर और मन की बात कार्यक्रम में दूसरे यूजर्स और श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं को महत्त्व दिया जाना उनके कम्युनिकेशन को दो तरफा बना देता है। यही वजह है की यह मंच सिर्फ पीएम नहीं, बल्कि और लोगों के भी संवाद का मंच बनता है।



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रक्षाबंधन पर बेस्ट कोट्स और विचार। Rakshabandhan Best Quotes In Hindi

रक्षाबंधन पर बेस्ट कोट्स और विचार। Rakshabandhan Best Quotes In Hindi

Rakshabandhan best Quotes and Shayari In Hindi

रक्षाबंधन पर बेस्ट कोट्स और विचार Rakshabandhan Best Quotes In Hindi

1. Times and money changes many things. But the love and the bond we share never changes. This Rakhi brings all the blessings, love and care for you. The memories may fade away with time but the love and special bond we share will grow ever stronger with each day... Happy Raksha Bandhan Wishes to You!

समय और धन बहुत सी चीजें बदल देते हैं, लेकिन हमारे प्यार और बंधन में कभी भी परिवर्तन नहीं होता। यह राखी आपके लिए सभी आशीर्वाद, प्रेम और देखभाल लाती है। यादें समय के साथ फीकी पड़ जाती हैं लेकिन प्यार और खास बंधन जो हम साझा करते हैं वह प्रत्येक दिन के साथ मजबूत होता जायेगा ... हैप्पी रक्षा बंधन आपको शुभकामनाएं!

2. We gain and lose things everyday. But trust me on one thing.
You'll never lose me. I will always be here. Happy Raksha Bandhan!

हम हर रोज चीजों को हासिल करते हैं और खो देते हैं लेकिन एक बात पर मेरा विश्वास करो
तुम मुझे कभी नहीं खोओगे. मैं हमेशा यहां रहूंगा। हैप्पी रक्षा बंधन!

3. We laugh and cry, we play and fight. We shared moments of happiness and sorrows, which made our bond stronger. Happy RakshaBandhan to you Sis.

हम हंसते और रोते हैं, हम खेलते हैं और लड़ते हैं. हमने खुशी और दुखों के क्षण साझा किए, जिसने हमारे बंधन मजबूत बनाये। हैप्पी रक्षा बन्धन आपको Sis "

4. I long for the day through the year that you so ceremoniously tie a Rakhi on my wrist and pray for my well being. Dear Sis, I wish that our bond grows stronger everyday.

मैं इस वर्ष के माध्यम से इस वर्ष के लिए लंबे समय से काम करता हूं कि आप मेरी कलाई पर इतनी विनम्रता से राखी बांधें और मेरे कल्याण के लिए प्रार्थना करें। प्रिय बहना, मैं चाहता हूं कि हमारा बंधन हर रोज मजबूत हो.

5. This Raksha Bandhan, I pray to God that, may our bond of love continue to grow stronger with each passing year.

यह रक्षा बंधन, मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि, हर गुजरते साल के साथ हमारा प्यार का रिश्ता लगातार मजबूत होता जाएं।

6. The best thing about having a sister was that I always had a friend. Thank you for always being there for me Sis. Happy Rakhi

एक बहन होने के बारे में सबसे अच्छी बात यह हैं कि मेरा हमेशा एक दोस्त है. हमेसा मेरे साथ रहने के लिए आपका शुर्किया मेरी बहना. हैप्पी रक्षाबंधन

7. To have a loving relationship with a sister is not simply to have a buddy or a confident -- it is to have a soulmate for life.

बहन के साथ प्यारभरा रिश्ता होने का साधारण सा मतलब दोस्त या विस्वास होना नहीं है- यह जीवन के लिए एक जीवनसाथी है

8. Having a you is like having a best friend I can't get rid of. I know whatever I do, you will still be there. Happy RakshaBandhan

आपका साथ होने का मतलब है एक परम मित्र का होना में इससे छुटकारा नहीं पा सकती. मैं जानती हू जो मैं करती हूँ, आप वह होंगे. हैप्पी रक्षा बंधन।

9. Sister A person who's been where you've been;
someone you can call when things aren't going right;
is more than just family;
a sister is a forever friend.
Happy Raksha Bandhan"

बहन एक ऐसी शख्श है जहा आप होंगे वह वो होगी,
जब चीजें सही नहीं जा रही हों आप उसे बुला सको,
एक परिवार से ज्यादा है;
एक बहन हमेशा के लिए दोस्त है
हैप्पी रक्षा बंधन

10. In the cookie of life, you my dear sister are the chocolate chips. Happy Raksha bandhan

जीवन की कुकी में, आप मेरी प्यारी बहन चॉकलेट चिप्स हैं। हैप्पी रक्षा बंधन

11. You take my hand and lead me along paths I would not have dared explore alone. Thanks for all the adventures my lovely sister.

आपने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे रास्तो पर निर्देशित किया, मुझे अकेले तलाशने की हिम्मत नहीं हुई. सभी कारनामों के लिए धन्यवाद मेरी प्यारी बहन.

12. We get and then forget many things in life, but it is very sure that your trust in me will never be broken. I am there and I will always be there for you no matter what!

हम मिलते हैं और फिर जीवन में बहुत सी चीजें भूल जाते हैं, लेकिन यह बहुत आश्वस्त है कि मुझ पर आपका विश्वास कभी नहीं टूटेगा। मैं वहां हूं और मैं हमेशा तुम्हारे लिए वहां रहूंगा, किसी की परवाह किया बिना.


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मस्तिष्क स्वस्थ रखने के बेहतरीन तरीके

मस्तिष्क स्वस्थ रखने के बेहतरीन तरीके

The best ways to keep the brain healthy In hindi


मस्तिष्क स्वस्थ रखने के बेहतरीन तरीके।The best ways to keep the brain healthy In hindi

दोस्तों दिनचर्या में तनाव, गलत खान - पान और हमारी निष्क्रिय जीवनशैली का असर हमारे मस्तिष्क पर भी पड़ता है। इसके वजह से हमें अवसाद, बेचैनी, व्यक्तित्व विकार, माइग्रेन, स्मृति सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है जीवनशैली में सरल से बदलाव मस्तिष्क को दुरस्त कर सकते है। दिमागी गतिविधि की प्रक्रिया में रुकावट डालने वाली चीजें जैसे स्मोकिंग, जंक फ़ूड, आरामदायक जीवनशैली और कम सोने से आपको बचना चाहिए।

आपके दिमाग को दुरस्त रखने के लिए ये 4 बेहतरीन तरीके...


1. हार्टरेट बढ़ाने वाली एक्टिविटी शुरू कीजिए

दोस्तों व्यायाम करने से ब्रेन डीराइव्ड नियूरोट्रोफिक फैक्टर (BDNF) प्रोटीन का स्तर बढ़ता है, यह सीखने, याद रखने और बेहतर सोच-विचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कसरत से हार्टरेट बढ़ता है। इससे दिमाग में रक्त प्रवाह बढ़ता है। वह चौकन्ना और चुस्त बना रहता है।


2. 27 मिनट ध्यान सीखने की क्षमता बढ़ाएगा

ध्यान कम होने से तनाव कम होता है। न्यूरोइमेजिंग में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार रोजाना औसतन 27 मिनट के ध्यान से सीखने की क्षमता, स्मृति और यहाँ तक की अपने- आप के बारे में जागरूकता, करुणा व आत्मनिरिक्षण की योग्यता में भी इजाफा होता है।

3. नींद बनाएगी बेहतर याददाश्त

नींद की कमी से संज्ञानात्मक कौशल, याददाश्त और स्पष्ट रूप से सोचने, सम्प्रेषण करने की कला पर भी बुरा असर पड़ता है। अच्छी व पूरी नींद से न्यूरॉन्स के बीच का सम्बन्ध मजबूत होता है और इस तरह दोस्तों याददाश्त व सीखने की क्षमता सुधरने में सहायता मिलती है।

4. मेग्नेशियम - आयरन का सेवन बढाए

दोस्तों हरी पत्तेदार सब्जियां, कम वसा युक्त चीजें, प्रोटीन वाले खाद्य जैसे मछली, साबुत अनाज, मशरूम, मैग्नीशियम से भरपूर मेवे, बीज, अंडे, एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर बैरिज, अवोकैडो व टमाटर न्यूरॉन्स की वृद्धि करके दिमागी क्षमता बढ़ाता हैं। जिस से आपका दिमाग चुस्त-दुरुस्त होता है और अलर्ट रहता है।


मस्तिष्क सम्बन्धी कुछ तथ्य

॰ दिमाग का वजन लगभग 1.5 किलोग्राम होता है।
॰ हमारे शरीर के वजन का 2 प्रतिशत होता हैं दिमाग का भार।
॰ दिमाग में 86 अरब के लगभग तंत्रिका कोशिकाएं(न्यूरॉन्स) होती है, जिसे 'ग्रे मैटर' भी कहते है।
॰ दिमाग में अरबों नर्व फाइबर्स (एक्सोन्स और डेंड्राइट्स ) होतें है - जिसे 'वाइट मैटर' कहते है।



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